कुपोषण मुक्त भविष्य के लिए एक डिजिटल प्रयास

Posted by: Digital Green September 30, 2016

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प्रस्तुति- डॉ ऋतेश कुमार, सहायक परियोजना प्रबंधक, डिजिटल ग्रीन


सूचना एवं प्रसार माध्यमों का हमारे जीवन में अति महत्वपूर्ण योगदान होता है, और उतना ही महत्वपूर्ण होता है सही सुचना का सही तरीके से सही समय पहुंचना. प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से ये हमारे विकास में सहायक होती हैं. किसी भी कायक्रम या परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर होती है की उस कार्य में सुचना एवं प्रसार के किन तरीकों का कितना सटीक प्रयोग किया गया है. यह तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जब दूसरी छोर पर सामान्यतया कम पढ़े लिखे या अनपढ़ समुदाय हो या ऐसे लोग हो जिन्हें सूचित किये जा रहे विषय पर पहले से कोई जानकारी न हो, गलत जानकारी हो या फिर उस विषय पर वो किसी अंधविश्वास से ग्रसित हों. झारखण्ड के परिप्रेक्ष्य में स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में बदलाव लाने की बात हो तो यह सर्वथा प्रासंगिक हो जाता है.

झारखण्ड राज्य में कुपोषण एक प्रमुख समस्या है. आंकड़े बताते हैं कि राज्य में 5 वर्ष से कम के लगभग 47.4 %, यानि लगभग 20 लाख बच्चे कुपोषित की श्रेणी में आते हैं. 5 वर्ष से कम उम्र के लगभग 15.6 % बच्चे, यानि लगभग 6.6 लाख बच्चे अपनी लम्बाई कि तुलना में सामान्य से कम वजन वाले तथा 42% (लगभग 17.9 लाख) बच्चे अपने उम्र की तुलना में कम वजन वाले हैं. स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार के लिए किये गए तमाम प्रयसों के बावजूद कुपोषण एक प्रमुख समस्या बनी हुई है, खासकर झारखण्ड राज्य के लिए. राज्य में कुपोषण को दूर करने के क्षेत्र में सामाजिक एवं व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना एक मुख्य समस्या है. इस के निदान के लिए एक स्वयत्त संस्था, झारखण्ड राज्य पोषण मिशन (JSNM) की स्थापना की गई है जिसका उद्देश्य एक दशक के भीतर राज्य को कुपोषण मुक्त करना है. राज्य पोषण मिशन ने राज्य को कुपोषण मुक्त करने में आने वाली समस्याओं को समझते हुए अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए डिजिटल प्लेटफार्म का सहारा लेना शुरू किया है, ताकि जनमानस को दी जा रही सुचना एवं जानकारी प्रभावी तरीके से उनतक पहुचे और उनका व्यवहार परिवर्तन सुनिश्चित हो. इसी क्रम में राज्य पोषण मिशन ने एक अन्तराष्ट्रीय संस्था, डिजिटल ग्रीन के साथ एक अनुबंध किया है.

डिजिटल ग्रीन स्थानीय जनता सरकारी/गैर सरकारी और निजी संस्थाओं के साथ भागीदारी करके खेती के बेहतर प्रचलनो, आजीविका, स्वास्थ्य और पोषण पर स्थानीय रूप से निर्मित विडियो और मानवीय मध्यस्थता के द्वारा ज्ञान का प्रसार करती हैं. एक नियंत्रित मूल्यांकन में इस पद्धति को परंपरागत विस्तारण की पद्धतियों की तुलना में दस गुना किफायती और नए प्रचालनों के अपनाने में सात गुना बेहतर पाया गया है.

डिजिटल ग्रीन संस्था 50 से अधिक सहभागियों के साथ मिलकर कई एशियाई और अफ्रीकी देशों के साथ साथ भारत के 8 राज्यों के 11,000 से अधिक गांवों में कार्य कर रही है. डिजिटल ग्रीन ने 20 से अधिक भाषाओं में 4300 स्थानीय विडियो के निर्माण और प्रसार को सहज बनाने में सहायता की है.

झारखण्ड राज्य पोषण मिशन के साथ मिलकर डिजिटल ग्रीन जमीनी स्तर पर काम कर रही है. डिजिटल ग्रीन संस्था ने राज्य के रामगढ जिले के पतरातू प्रखंड से अपने कार्य की शुरुवात की है तथा सबसे पहले कुछ चुनिन्दा आंगनवाड़ी सेविकाओं को विडियो बनाने की तकनीक तथा उसके एडिटिंग पर प्रशिक्षित किया है. ये प्रशिक्षित आंगनवाड़ी सेविकाएँ स्थानीय और प्रासंगिक विडियो बनाने का कार्य कर रही हैं. प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अपना पहला विडियो ‘पूरक आहार’ विषय पर बनाने के बाद ये आंगनवाड़ी सेविकाएँ बहुत उत्साहित थीं.

आंगनवाड़ी सेविका आशा देवी ने कहा – हमे विश्वास नहीं हो रहा है कि हमने डिजिटल कैमरे का इस्तेमाल करके एक विडियो बना लिया है, यह हमारे लिए बहुत ही रोमांचकारी अनुभव रहा है’.



प्रशिक्षित आंगनवाड़ी सेविकाएँ विडियो शूटिंग करते हुए


झारखंड राज्य पोषण मिशन इन प्रशिक्षित आंगनवाड़ी सेविकाओं की मदद से स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़े बिभिन्न विषयों पर विडियो बनाने का कार्य करेगी. कुपोषित एवं अति कुपोषित बच्चो की पहचानने से लेकर कैसे उन्हें कुपोषण मुक्त करना, गर्भवती माताओं के देखभाल एवं उनके खान पान से सम्बंधित जानकारी, स्तनपान, 0-5 वर्ष तक के बच्चो कि उचित देखभाल, किशोरी लड़कियों के स्वस्थ्य एवं पोषण से सम्बंधित विषय एवं सफाई और स्वछता, कुछ ऐसे विषय होंगे जिनपर स्थानीय लोगो का उपयोग कर स्थानीय भाषा में विडियो बनाये जाएँगे.

प्रशिक्षित आंगनवाड़ी सेविकाओं द्वारा स्थानीय स्तर पर बनाये जा रहे इन विडियो को पतरातू प्रखंड के विभिन्न आंगनवाड़ी केन्द्रों में ग्रामीणों को दिखाकर उन्हें जागरूक किया जायेगा. विडियो दिखाने एवं विषय को समझाने के कार्य के लिए प्रखंड के 104 आंगनवाड़ी सेविकाओं को विडियो प्रसार प्रशिक्षण दिया गया है.



आंगनवाड़ी सेविकाओं का विडियो प्रसार तीन दिवसीय विडियो प्रसार प्रशिक्षण



इनमे से कुछ आंगनवाड़ी सेविकाओं ने तो बैटरी चालित प्रोजेक्टर की मदद से अपने गाँव में विडियो दिखा कर प्रशिक्षित करने का कार्य शुरू भी कर दिया है. सितम्बर माह के पहले सप्ताह से सभी 104 आंगनवाड़ी सेविकाएँ अपने आंगनवाड़ी केंद्र में डिजिटल ग्रीन के सहयोग से विभिन्न विषयों पर बने इन विडियो को दिखाकर ग्रामीणों को जानकारी देने का कार्य शुरू कर देंगी.


विडियो माध्यम द्वारा अपने लाभुकों को पूरक आहार’ विषय पर जानकारी दे रही सेविका मम्दुहा परवीन बताती हैं – विडियो के माध्यम से जानकारी देना बहुत ही अलग अनुभव रहा है, इससे हमारा काम आसान हो गया है. लाभुको को भी यह तरीका बहुत पसंद आया, उन्हें विषय को समझने में आसानी हुई तथा मैं बहुत अच्छी तरह उन्हें विषय की जानकारी दे पायी, निश्चय ही इस तकनीक से जानकारी देने के बाद लाभुक दी गई जानकारी को अधिक से अधिक अपनाएंगे’.



लाभुकों के बीच पूरक आहार’ के विडियो का प्रसार एवं चर्चा करती सेविका मम्दुहा परवीन


डिजिटल ग्रीन संस्था ने राज्य पोषण मिशन के साथ मिलकर प्रथम चरण में रामगढ जिले के पतरातू प्रखंड से प्रसार की इस तकनीक की शुरुवात की है. डिजिटल ग्रीन संस्था राज्य पोषण मिशन के साथ मिलकर उनके ग्रामीण स्तर के कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने का कार्य करेगी, समय समय पर क्षेत्र में जाकर ग्रामीण स्तर के कार्यकर्ताओं के कार्यों जैसे की विडियो बनाने और दिखाने के क्रम में, उनकी मदद करेगी. परियोजना के सफल क्रियान्वयन के बाद इस तकनीक का उपयोग राज्य के अन्य जिलों में भी किया जायेगा जिससे कि हमारा राज्य कुपोषण मुक्त हो सके.



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